इंसान को चुभता क्या है ? 

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 कभी कभी ऐसी बाते आ जाती हैं जो दिलो दिमाग से निकलती ही नहीं ,कचोटती हैं , तंग करती हैं , नार्मल वयवहार को प्रभावित करती हैं ।
क्या हैं वो बातें , क्यों याद आती हैं ,क्यों इतना असर करती हैं , इतनी बातें रोज होती हैं उनमें से कुछ क्यों दिमाग से नहीं निकल पाती ?
कितना ही प्रैक्टिकल इंसान हो आखिर है तो इंसान ,उसे भी दर्द होता है वो भी महसूस करता है ,उसकी भावनाएं भी कहीं न कहीं उपेक्षा की शिकार हुई हैं , बिना किसी कारण उसे बहुत बार सब्र करना पड़ता है , पीछे हटना पड़ता है और खास कर वहां जहां वो सही होता है या उसका हक होता है ।।
बहुत से कारण हैं और यही वो कारण हैं जो किसी से प्रति किसी की सोच बदल देते हैं , वयवहार बदल देते हैं सम्मान की भावना बदल देते हैं , ।
अच्छे खासे इंसान को चिड़चिड़ा और रुखा बना देते हैं ।
 समाज का कोई वर्ग हो इस से फर्क नहीं पड़ता ,वर्ग से तो इतना फर्क पड़ता है कि प्रतिकिर्या का तरीका बदल जाता है बस ।
निम्न वर्ग में भावनाएं ज्यादा तीव्र होती हैं ,वो आपस में एक दूसरे पर ज्यादा निर्भर होते हैं ,उन्हें बुरा भी जल्दी लगता है और वो प्रकट भी जल्दी करते हैं ,इस से उलट अभिजात्य वर्ग ज्यादा तनाव में रहता है , संबंधों को ज्यादा बर्दाश करने की कोशिश में अपना मूल स्वभाव बिगाड़ लेता है ।।
Relation crisis  उच्च वर्ग में एक महामारी बन गया है । सब है पर कुछ नहीं है , सब फीका फीका व्यर्थ लगता है । किस लिए ,किसके लिए और क्यों ?
ये सवाल रोज का , इन्ही सवालों पे हम सिलसिलेवार बात करेंगे इस ब्लॉग के जरिये या ये मानिये की आपकी कॉउंसलिंग होगी जिसके बाद आप हल्का महसूस करेंगे , आपकी चुभन को एक अलग नज़रिये से देखेंगे ताकि एहसास बदल सके थोड़ी सांस आराम से आने लगे ,कुछ खार जिंदगी के कम हो जाएं ।
मिलते है एक चुभन के साथ अगले ब्लॉग में ।।

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