12th class agriculture notes

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                  अध्याय: 1 सिंचाई

सिंचाई की परिभाषा (सिंचाई की परिभाषा)
पौधों की वृद्धि के लिए मृदा में आवश्यक नमी संभरण के लिए कृत्रिम रूप से पानी देने की क्रिया को सिंचाई के रूप में माना जाता है
सिंचाई के उद्देश्य (सिंचाई के उद्देश्य)
1. पौध वृद्धि हेतु मृदा में आवश्यक नमी की पूर्ति हेतु |
2. फसल को अल्पवधि सूखे से रिसकर उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए |
3. कर्षण पुरम परत को नरम करने से कर्षण क्रिया के अनुकूल बनाने के लिए |
4. मृदा में स्थित लवणों के निक्षालन करने या उसे तनु करने के लिए |
5. फसलों को पाले से बचाने के लिए |
फसल में सिंचाई कब करे (सिंचाई का निर्धारण)
फसलो में उपउक्त समय पर सिंचाई करने के लिए निम्नलिखित आधार पर आपना जा सकता है।
1.पौधो के आधार पर
सिंचाई का समय पौधो में जल की मात्रा जल विभव मापकर, पौधो में जल की कमी से उत्पन्न लक्षणों को देखते हुए वे
पौधे की उचित क्रांतिक अवस्थाएं जानकर कर सकते हैं।
अउपौधों की बाह्रा स्थिति देखकर
प्रातः काल और दोपहर के समय खेत में जाएं पौधों का अवलोकन करना चाहिए यदि प्रात: काल दो-तीन दिन तक
लगातार पत्ती मुरझाई हुई दिखाई दे तो सिंचाई करना आवश्यक है
ब.पौधों की पत्तियों में जल की मात्रा या जल विभव मापकर
पौधों की पत्तियों की स्काई और उनमें वर्तमान जल विभव / जल की मात्रा को सही। सिंचाई कर सिंचाई करें तो यह विधि
सिद्धांत रूप से सबसे उपयुक्त है
स। पत्तियों का तापमान सक्रिय कर
जब मृदा वे पौधों में पानी की कमी होने लगती है तो पत्तियों के पर्ण रन्ध्र आंशिक वे पूर्णतया बंद हो जाते हैं।
वाष्प समझौतों में कमी आती है वह पत्तियों का तापमान बढ़ जाता है इस विधि को इन्फ्रा रेड हीटरैटर की सहायता से
फसल की सतह का तापमान कर कर सिचाई का निर्धारण करते हैं
द। फसलों की क्रान्तिक अवस्थाओ के आधार पर
फसलों के कुछअवस्थों ऐसी होती है जिन प्र पानी की कमी हो सकती है तो पौधों को बहुत नुकसान पहुँचती है और उपज
काफी कम होती होती है पौधेकी ऐसीअवस्था को ही सिंचाई के आधार पर क्रान्तिक अवस्था कहते है।
2 मुदा नमी के आधार पर
मृदा में उपलब्ध जल की उपरी सीमा स्थाई मलाईड बिंदु कहलाती है इन दोनों के मध्य मृदा जल की मात्रा ही पौधों को
उपलब्ध होती है इसे प्राप्य जल कहते हैं।

.फसलो में सिचाई
फसल उत्पादन में सिंचाई का समय जितना महत्व हे उतना ही फसल की आवश्कता के अनुसार सिचाई की मात्रा का भी है किसी फसल के लिए जल की मात्रा आवश्कता विभिन कारको पर निर्भर करती है। इनमे फसल की किस्म, भूमि की किस्म, बुआई का समय, मौसम आदि प्रमुख ने विभिन्न फसलों में सिंचाई की संख्या को समय और जल मांग सरणी में दी गई है।

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